संत कबीर की वाणी — अर्थ सहित, प्रतिदिन एक नया दोहा
मृत्यु · Mortality
2 नवंबर 2026, सोमवार
पत्ता बोला वृक्ष से, सुनो वृक्ष बनराय।
अब के बिछुड़े ना मिले, दूर पड़ेंगे जाय॥
भावार्थ: एक पत्ता वृक्ष से कहता है कि हे वृक्ष, मेरी बात सुनो। अब जब हम एक बार अलग हुए, तो फिर कभी नहीं मिलेंगे, क्योंकि हम एक-दूसरे से बहुत दूर चले जाएंगे। यह दोहा जीवन की क्षणभंगुरता और विछोह की अपरिहार्यता को दर्शाता है।
Kabir Amritwani — कबीर के दोहे अर्थ सहित
Kabir Amritwani संत कबीर दास जी की अमृत वाणी का ऑनलाइन संग्रह है। यहाँ Kabir Ke Dohe (कबीर के दोहे) 2,300 से अधिक दोहों के रूप में हिंदी भावार्थ और English translation के साथ उपलब्ध हैं — गुरु, प्रेम, सत्य, समय, भक्ति, माया और ज्ञान जैसे 14 विषयों में।
संत कबीर दास 15वीं शताब्दी के भक्ति काल के महान संत और कवि थे, जिनका संबंध काशी (वाराणसी) से था। उनके दोहे सरल सधुक्कड़ी भाषा में जीवन, गुरु-महिमा, सच्ची भक्ति और पाखंड-विरोध की सीख देते हैं।
कबीर के दोहे कहाँ पढ़ें?
kabiramritwani.com पर सभी दोहे और हिंदी भावार्थ नि:शुल्क हैं। English translation, गीतमाला और ईबुक Lifetime Pro (₹149, एक बार का भुगतान) में मिलते हैं।